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इस्लाम में महिलाओं की स्थिति

 इस्लाम में महिलाओं या किसी भी विषय पर क्या सही है अथवा क्या नहीं इसके लिए नैतिकता या अपनी बुद्धि का प्रयोग करने की अनुमति नहीं है । इस्लाम में नैतिकता से धर्म ग्रंथों का विवेचन नहीं होता है वरन् कुरान व हदीस में जो लिखा है वह स्वयं नैतिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है । कुरान व हदीस मे लिखी हर बात सत्य है । हो सकता है कि हिन्दुओं के ग्रंथों में भी स्त्री के लिए यही सब कुछ लिखा हो पर विषय यह है कि क्या हिन्दू अपने धर्म ग्रंथों पर आंख बंद कर विश्वास करते हैं । हिन्दू अपने धर्म ग्रंथ की किसी भी बात को अपनी बुद्धि पर कस कर ही उस को मानते हैं यही कारण है भारत में स्त्री की दशा को उन्नत करने के लिए कई कानून संसद द्वारा बनाए जा चुके हैं । परन्तु इस्लाम में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है । मुसलमानों कहते हैं कि कुरान व हदीस में किसी भी संशोधन की कोई जरूरत नहीं है । इस्लाम का एक मात्र ध्येय सारी दुनिया को मुसलमान बनाना है । इसीलिये इस्लाम द्वारा हिन्दु महिलाओ के लिये लविग जेहाद चलाया जा रहा है। कोई भी हिन्दू लड़की मुस्लिम बनने से पहले इस लेख को अवश्य पढ़ें गर्भ निरोधक हराम सामान्य व्यक्ति भी यह अंद...

फ़िकहों में जिहाद

 इस्लामी फ़िकह (कानून की किताबों) में जिहाद इस्लाम में मुखयतया चार प्रकार की काननू व्यवस्था है : इनके अनुसार जिहाद का अर्थ गैर-मुसलमानों को मुसलमान बनाने के लिए युद्ध करना है। १. हनीफ़ी फिक़ह (६९९-७६७ ए. डी.)- ”जिहाद का मतलब है अपनी जान, माल और वाणी से अल्लाह के मार्ग में लड़ने के लिए शामिल होना” तथा ”गैर-मुसलमानों को सच्चे मज़हब इस्लाम की ओर आने का निमंत्रण देना और यदि वे इस सच्चे मज़हब को स्वीकारने के लिए तैयार न हों तो उनके विरुद्ध युद्ध करना है।” २. मलिकी फिक़ह (७१५-७९५ ए. डी.)-जिहाद का अर्थ है ”मुसलमान अल्लाह के मज़हब को बढ़ाने के लिए ‘काफ़िरों’ से युद्ध करें।” ३. शफी फिक़ह (७६७-८२० ए. डी.)-”शरियाह के अनुसार जिहाद का मतलब है ”अल्लाह के मार्ग में लड़ने के लिए जी तोड़ कोशिश करना।” ४. हमबाली फिक़ह (७८०-८५५ ए. डी.)-”जिहाद का मतलब है ”गैर-मुसलमानों से युद्ध करना।” (जिहाद फिक्जे़शन, पृ. २१) अध्याय-०५ शब्दकोशों में जिहाद शब्दकोशों में जिहाद (i) वेब्सटर्स थर्ड न्यू इन्टरनेशनल डिक्शनरी (पृ. 1216) “A holy war waged on behalf of Islam as a religious duty; a bitter strife or crusade undertaken in the s...

जिहाद का कार्य रूप में स्वरूप

 भारत पर राज्य करने वाले मुस्लिम शासक, भूमण्डल के विभिन्न युगों, वंशों, और क्षेत्रों से सम्बन्धित थे। उनकी भाषायें भिन्न थीं किन्तु उनके व्यवहार का प्रारूप् पूर्णतः एक समान था और वह अब भी है। इस चमत्कारिक व्यवहार की एकरूपता, का कारण कुरान, हदीस, सुन्नाह आदि में ही निहित है जिन्हें कि वे गर्व के साथ न केवल उद्धत करते हैं बल्कि अनुसरण भी करते हैं। इस्लामी पंथ के दो पहलू हैं। एक है सैद्धान्तिक पक्ष जो कि इस्लामी धर्म ग्रन्थों, कुरान (अल्लाह के इलहाम या प्रगटीकरण), हदीसों (पैगम्बर के कर्म और वचन) और सुन्नाह (पैगम्बर द्वारा बनाये नियम) द्वारा प्रतिपादित है। दूसरा पक्ष है जिहाद यानी कि इस्लामी धर्म युद्ध। ये दोनों पक्ष आपस में पूरी तरह जुड़े हुए हैं और यह पवित्र कुरान ही है जो कि अल्लाह के मार्ग में अल्लाह के लिए इस्लामी संघर्ष, ”जिहाद” करने को प्रेरित तथा निर्देश करता है, मार्गदर्शन् करता है। आज भूमण्डल के सभी प्रबुद्ध नागरिक, विभिन्न भागों में बोस्नियाँ से लेकर फिलिपाइन तक, चैचिनियाँ से लेकर कश्मीर तक, रह रहे हैं, अरबी शब्द ”जिहाद”, से किसी न किसी मात्रा में परिचित हो चुके हैं, और कुछ ...

कुरआन का आदेश

 यह कुरआन के आदेश हैं !मान लो !वरना …..!! इस्लाम शान्ति का धर्म है .और मानवमात्र के कल्याण की कामना रखता है.कुरआन लोगों में भाईचारा फैलाना चाहता है.कुरान लोगों को अत्याचार और अन्याय से मुक्ति दिलाता है.ताकि विश्व के सारे लोग बिना भेदभाव के सुख शान्ति से जी सकें. इसीलिए अल्लाह ने अपने प्यारे अंतिम रसूल मुहम्मद को कुरआन देकर दुनिया में भेजा था.कि वह कुरआन का शान्ति सन्देश दुनिया भर में पहुंचा दे.और मुहम्मद के बाद यह काम मुसलमान करते रहें. इसी कुरआन के ऊपर फ़िदा होकर लाखों लोग इस्लाम कबूल कर रहे हैं .और दुनिया के कोने कोने में शान्ति फैला रहे हैं.जैसा कि हम रोज अखबारों में पढ़ रहे हैं और टी वी में देख रहे हैं .आखिर कुरआन की शिक्षा में क्या है ,आप इसके कुछ नमूने देखिये – 1 -गैर मुसलमानों पर रौब डालो ,और उनके सर काट डालो . काफिरों पर हमेशा रौब डालते रहो .और मौक़ा मिलकर सर काट दो .सूरा अनफाल -8 :12 2 -काफिरों को फिरौती लेकर छोड़ दो या क़त्ल कर दो . “अगर काफिरों से मुकाबला हो ,तो उनकी गर्दनें काट देना ,उन्हें बुरी तरह कुचल देना .फिर उनको बंधन में जकड लेना .यदि वह फिरौती दे दें तो उनपर अहस...

कुरान को किसने बनाया था?

 मुसलमान कुरआन को अल्लाह की किताब यानि ईश्वरीय पुस्तक बताते हैं .और दावा करते हैं कि इसको बनाने वाला मुहम्मद या कोई इंसान नहीं है .जबकि इस बात के कई प्रमाण है कि कुरान के अलग अलग हिस्सों की रचना कई लोगों के द्वारा अलग अलग समय पर की गयी थी .उन्हीं में से एक व्यक्ति मुहम्मद का उस्ताद “वरका बिन नौफल “भी था .जिसने कुरआन की कई सूरतें (अध्यायों )की रचना की थी .ऐसी ही एक सूरा 19 मरियम भी है .कुरान के गुप्त अक्षरों को खोलने (Decifer ) करने पर कुरान की इस सूरा के लेखक का पता चल गया है .इसके सबूत दिए जा रहे हैं – अक्सर देखा गया है कि,जब ऎसी किसी महत्वपूर्ण बात को छुपाने की जरूरत होती है तो लोग तरह तरह के गुप्त संकेतों (Code Languages ) का प्रयोग करते हैं .कई बार इस विधि का उपयोग युद्ध के समय किया जाता है ,या लोगों की बुद्धि की परीक्षा के लिए पहेलियों की तरह प्रयोग किया जाता है .ग्रीक ,यहूदी ,ईसाई इस विधि का प्रयोग अक्सर करते आये हैं .क्योंकि इनकी वर्णमाला (Alphabets ) हरेक अक्षर की एक संख्यात्मक कीमत (Numerical Value ) निर्धारित होती है .अर्थात हरेक अक्षर (letter ) एक संख्या (Number )को दर्श...

लौंडियों का क्या करें ?यह कुरआन बताती है !

 आप इस शब्द को कूई गाली या अपशब्द नहीं समझें .यह तो कुरआन का एक पारिभाषिक शब्द है .जो कुरआन के हिन्दी अनुवाद के साथ दी गयी पारिभाषिक शब्दावली के पेज नंबर 1293 पर “लौंडी ‘शब्द के बारेमे अभिप्रेत किया गया है .लौंडी वह औरतें होती हैं ,जिन्हें जिहादी युद्ध में पकड़ लेते हैं ,या अगवा कर लेते हैं .बाद में यातो उन औरतों से जबरन शादी कर लेते हैं ,या बलात्कार करके बेच देते है .अगर इस्लामी राज होता हो तो औरतों को मुसलमानों में बाँट दिया जाता है . जिहाद के बारे में कुरआन में यह कहा गया है – 1 -अल्लाहको मुसलमानों का जिहाद करना हरेक चीज से जादा प्यारा लगता है .सूरा -अत तौबा 9 :24 2 -अल्लाह उन लोगों से प्यार करता है ,जो पंक्ति बनाकर क़त्ल करते हैं सूरा-अस सफ़ 61 :4 जिहाद अल्लाह की नजर में एक धार्मिक कार्य है .जिसे अल्लाह पसंद करता है .जिहाद में धन दौलत के साथ औरतें भी लूटी जाती हैं .लूट कू इस्लाम में “माले गनीमत “कहा जाता है .कुरआन में लूटी गयी और पकड़ी गयी औरतों के लिए अरबी में जो शब्द दिए गए है वह हिन्दी ,अंगरेजी ,और अरबी के साथ कुरआन के हवाले से दिए जा रहे है 1 -सूरा -अल मोमनीन 23 :6 मलिकत ईम...

मुहम्मद की मौत आयशा के साथ सम्भोग करते समय हुई थी

 मरते समय उसने कलमा नहीं पढ़ा थाइस बात के प्रमाण हैं की मुहम्मद की मौत सेक्स की अधिकता से हुई थी हदीस-इब्ने हाशाम -पेज ६८२ इन से रवायत है की “मैंने आयशा से सुना की जिस दिन नबी की मौत हुई थी ,उस दिन उनके सस्थ सोने की मेरी बारी थी.सम्भोग करने के बाद उनकी मौत मेर घर में हुई थी .मरते वक्त उनका सर मेरे सीने पर था. मैं उनकी मौत के लिए खुद को दोषी मानती हूँ.’ आयशा ने कहा की जिस समय अल्लाह ने रसूल को उठाया था,उनका सर मेरी गर्दन के पास था,और वह मुझे चूम रहे थे,उनका थूक मेर थूक से मिल रहा था. उनकी मौत के लिए मैं खुद को जिम्मेदार मानती हूँ,उस समय मेरी किशोरावस्था थी.मैं नादाँ थी मैं तो नबी को और उत्तेजित करना चाहती थी. और कामक्रीड़ा में उनका सहयोग करना चाहती थी.लेकिन अनुभव हीनता के कारण मुझे पता नहीं था किजब कोई बूढा और बीमार व्यक्ती किसी एक जवान औरत के साथ जंगली की तरह संसर्ग करता है ,तो क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं .वरना मैं उनको रोक लेती. मैंने उस वासना के चरम आनंद के क्षण पर उनको रोकना उचित नहीं समझा.मैं देखती रही,वह मेरी छाती पर लुढ़क गए . आयशा ने कह कि ,मरते समय नबी ने कलमा नही पढाथा क्य...