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मुस्लिम औरतें जहन्नम के लायक – muslim women will go to hell

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 allah against women, hellfire for women, islam against women, islam and women, Muslim women, muslim women and islam, muslim women in hell मुसलमान अक्सर यह दावा करते हैं कि अल्लाह की नजर में स्त्री और पुरुष दोनों समान हैं .और क़यामत के दिन दोनों को उनके कर्मों के अनुसार फल दिया जाएगा .और यह तय किया जाएगा कि कौन जन्नत में जाएगा और कौन जहन्नम में जाएगा .अल्लाह किसी भी तरह का पक्षपात नहीं करेगा .लेकिन यह बात सरासर झूठ है . मुस्लिम औरतों को पता होना चाहिए कि मरने के बाद उनको हमेशा के लिए जहन्नम में डाल दिया जाएगा .चाहे वे कितनी भी नमाजें पढ़ें ,या रोजे रखें .उनका प्यारा रसूल खुद उनको जहन्नम में ठूंस देगा .और वे जहानम से कभी नहीं निकल पाएंगी .यह बात सभी हदीसों में लिखी है .  1 -मुहम्मद का औरतों से नफ़रत का कारण . सब जानते हैं कि मुहम्मद को अरतों का बहुत शौक था .वह दुनिया की सारी औरतों को अपनी सम्पत्ती मनाता था.और चाहता था कि अरबी ,यहूदी ,रोमन ,इरानी सभी तरह की औरतें उसके पास हों .लेकिन उसके भाग्य में जादातर विधवा औरतें ही आयी थीं ..इतिहासकारों के अनुसार मुहम्मद कुरूप ,मोटा ,स्थूल और भद्दा...

बौद्ध अनुयायी के स्त्री विरोधी विचार

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  चाणक्य नीति में आये स्त्रियों पर आये कुछ श्लोक देख कुछ बौद्ध आप्पति करते है लेकिन उन्हें अपने पालि ग्रंथो और बौद्ध भिक्कुओ द्वारा लिखे ग्रंथो पर भी ध्यान देना चाहिए | यदि आप कहे कि ये ब्राह्मणों की मिलावट है तो फिर बौद्ध मत की अच्छी बाते भी ब्राह्मणों की माननी चाहिए क्यूंकि बौद्ध ग्रन्थ आदि बुद्ध के काफी बाद लिखे गये है उनके अधिकतर शिष्य ब्राहमण और क्षत्रिय (शाक्य ,लिच्छवी ) आदि ही रहे है | और यदि बौद्ध बन कर भी वे ब्राह्मण मत का प्रचार करते रहे तो उन्होंने बौद्ध मत ही क्यूँ फैलाया क्यूँ बाद में उसे वैदिक /हिन्दू में परिवर्तित नही किया | यहा तक की बौद्ध को हिन्दू देवो से ऊंचा तक बताया और अशोकवंदन जैसे काल्पनिक ग्रन्थ बना मनमाने आक्षेप आर्य राजाओ पर लगाये | इससे स्पष्ट है कि वे बौद्ध धम्म प्रचारक ही थे चमत्कारिकता से अधिक लोग भक्त अनुयायी बनते है इसलिए उन्होंने चमत्कार जोड़े न कि बौद्ध मत को गिराने के लिए |  तो प्रसिद्ध बौद्ध सारिपुत्त के शिष्य संघरक्खित जो बौद्ध सम्राट विजय बाहू के समय संघराज थे इनकी कृति है " सुबोधालन्कार " जिसमे इन्होने लिखा है -  " स्त्रियों पर ,दुर्...

बौद्धवादी पितृसत्ता समाज

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 आजकल एक अभियान वामपंथियों और अम्बेडकरवादियों के द्वारा बडे ही जोरो शोरो से चल रहा है, जिसका नाम है - ब्राह्मणवादी पितृसत्ता। ये लोग पितृसत्ता का विरोध करें और महिला स्वतंत्रता को बढावा देंवे, वो बात तो कुछ - कुछ समझ में आती है किन्तु इनके द्वारा एक धर्म और उस धर्म में भी किसी समाज या जाति विशेष को निशाना बनाना इनकी ईर्ष्या और षड्यंत्र को दर्शाता है। इन्हें पितृसत्ता केवल ब्राह्मणों में ही दिखती है किन्तु मुस्लिम, ईसाई और बौद्धों में नही दिखती है। क्या आदम की पसली से हव्वा का होने का उदाहरण पितृसत्ता को बढावा देने वाला नही है? क्या नारियों को बुर्के और हिजाब में ही रखना पितृसत्ता का उदाहरण नही है? ऐसे अनेकों बातें अन्य मतों में भी मिल जाएगी किन्तु फिर भी इसे मात्र ब्राह्मण पितृसत्ता नाम देना इनकी कुंठित मानसिकता ही है। अब एक नजर बौद्ध धम्म पर भी डाल देते हैं, जिसमें पहले बौद्ध संघ में गौत्तम बुद्ध ने महिलाओं के प्रवेश को निषेध कर दिया था, इस पर आन्नद और बुद्ध में बहस भी हुई किन्तु आन्नद की जिद के कारण बुद्ध को भी संघ में महिलाओं के प्रवेश की बात को मानना पडा। लेकिन बात यही तक खत्म ...

बुद्ध को मानने वालो की उत्पति ब्रह्मा के मुख से हुई है!

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 दीघनिकाय अग्गञ्जसुत्त पृष्ठ ६५५   यस्स खो पनस्स, वासेट्ठ, तथागते सध्दा निविट्ठा मूलजाता पतिट्ठिता दव्हा असंहारिया समणेन वा ब्राह्मणेन वा देवेन वा मारेन वा ब्रह्मुना वा केनाचि वा लोकस्मिं,तस्सेतं कल्लं वचनाय-'भगवतोम्हि पुत्तो ओरसो मुखतो जातो धम्मजो धम्मनिम्मितो धम्मदायाद'ति।तं किस्स हेतु?तथागतस्स हेतं वासेट्ठ अधिवचनं 'धम्मकायो' इति पि,'धम्मभूतो' इति पि 'ब्रह्मभूतो'इति पि। जो बुद्ध पर आस्था रखता है,अगर वह कहे की वह ब्रह्मा अर्थात बुद्ध के मुख से पैदा हुवा है तो यह मानने योग्य है।यहां स्पष्ट किया गया है कि, जो तथागत अर्थात बुद्ध में श्रद्धानिविष्ट है उनमे जिसकी श्रद्धा जड़ जमा चुकी है , प्रतिष्ठित है,दृढ़ है,वह किसी भी ब्राह्मण या श्रमण देव, मा(ब्रह्मा) या संसार मे किसी के द्वारा डिगाया नहीं जा सकता! अतः ऐसे ही व्यक्ति का यह कहना उचित है कि मैं भगवान के मुख से उत्पन्न, धर्म से उतप्पन, धर्म निर्मित या धर्मादाय पुत्र हूँ | क्यो की धर्मकाय , ब्रम्हा ,ब्रह्मकाय, धर्मभूत , ब्रम्हाभूत आदि यह सब नाम तथागत अर्...

स्त्रियाँ अवन्दनीय है। - गौत्तम बुद्ध

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 अम्बेडकरवादी और वामपंथी ये कहते हैं कि हिन्दु धर्म पुरुषवादी धर्म है। यहाँ स्त्रियों का कोई महत्त्व नही है। ये लोग बुद्ध धम्म को स्त्रियों को अधिकार देने वाला भी मानते हैं तथा ऐसा भी मानते हैं कि बुद्ध ने स्त्रियों को सम्मान दिया था। किन्तु इनकी ये बात असत्य है। जब हम त्रिपिटकों का अध्ययन करते हैं तो ये बात स्पष्ट हो जाती है कि बुद्ध ने एक नर भिक्षु और मादा भिक्षु में पर्याप्त भेदभाव रखा है। बुद्ध संघ में स्त्री अधिक परतंत्र है। इतना ही नही बुद्ध ने 10 अवन्दनीयों में स्त्री को भी अवन्दनीय कहा है। विनयपिटक के चुल्लवग्ग 6{3/5 में बुद्ध कहते हैं - "भिक्षुओं! यह दश अवन्दनीय हैं - पूर्व के उप सम्पन्न को पीछे का उपसम्पन्न। अन् उपसम्पन्न अवंदनीय है। नाना सह - वासी, वृद्धतर अधर्मवादी अवंदनीय है। स्त्रियाँ अवन्दनीय है। नपुंसक अवन्दनीय है। परिवास दिया गया अवन्दनीय है।........ इस तरह दश अवन्दनीयों के बाद 3 वन्दनीयों का उल्लेख करते हुए बुद्ध कहते हैं - यह तीन वन्दनीय हैं - 1 पीछे उपसम्पन्न द्वारा पहिले का उपसम्पन्न वन्दनीय है। 2 नाना सहवास वाला वृद्धतर धर्मवादी वन्दनीय है। 3 देव - मार - ब्रह...

इस्लाम के उदय के कारण हुआ ईरान से बौद्ध धर्म का नाश

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दूसरी शताब्दी में बौद्ध मत ईरान में फैल चुका था, अब ईरान में 224 AD में सस्सनिद साम्राज्य आ चुका था जिन्होंने पारसी मत को अपने साम्राज्य का राष्ट्रीय मत घोषित कर दिया था जिसकी वजह से उन्होंने बौद्धों के कई सारे धर्म स्थलों का नाश कर दिया परंतु फिर भी पूर्व में कई सारे धर्म स्थल बज गए थे जो बाद में पांचवीं सदी में हूणों द्वारा नष्ट किए गए [ Source 1] अब इसके कई सालों बाद ईरान पर अरब के मुसलमानों का कब्जा हो गया जिसके बाद ईरान से बौद्ध मत कर संपूर्ण नाश हो गया । अरब के मुसलमानों ने बौद्ध मत को अफगानिस्तान और ईरान से समाप्त कर दिया हालांकि कुछ जगहों पर बौद्ध मत आठवीं नौवीं सदी तक बज गया था । [ Source 1 ] ईरान के राजा हुलगु खान ने बौद्ध मत अपना लिया और हुलगु खान के काल से 1295AD तक राष्ट्रीय धर्म बौद्ध मत रहा परंतु 1295 में मंगोल के राजा महमूद ग़ज़ान जिन्होंने बचपन में बौद्ध मत की शिक्षा ली थी परंतु बाद में इस्लाम अपना लिया था उन्होंने ईरान में बौद्ध मत पर रोक लगा दी, बौद्धों की मूर्तियां और मंदिरों का सर्वनाश कर दिया और उन्हें ईरान से बाहर किसी बौद्ध देश में जाने को कहा, इस तरह ईरान से बौ...

इस्लाम के कारण हुआ बौद्ध धर्म का पतन: डॉ बी आर अम्बेडकर

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 भारत में बौद्ध धर्म का नाश कैसे हुआ इस पर बाबा साहब अंबेडकर अपनी पुस्तक में कहते हैं - इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत से बौद्ध धर्म के विलुप्त होने का कारण मुसलमानों का आक्रमण है, इस्लाम बुत के शत्रु के रूप में आया था, सब जानते हैं कि बुत एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है मूर्ति परंतु ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता है कि बुत शब्द कि उत्पत्ति कैसे हुई है, बुत शब्द की उत्पत्ति बुद्ध शब्द के अरबी अपभ्रंश से हुई है, अर्थात शब्द की उत्पत्ति ही यह सिद्ध करती हैं कि मुसलमानों के दिमाग में बुत परस्ती का संबंध बुद्ध के धर्म से है । तो मूर्तियों को तोड़ने का कार्य बन गया बौद्ध धर्म के विध्वंस का कार्य । इस्लाम ने केवल भारत में ही नहीं अपितु जहां-जहां वह गया वहां-वहां बौद्ध धर्म का सर्वनाश कर दिया, जब इस्लाम का अस्तित्व नहीं था तब Bactria, Parthia, अफगानिस्तान गांधार, चाइना का तुर्कमेनिस्तान अर्थात पूरे एशिया में बौद्ध धर्म अस्तित्व में था, इन सभी देशों में इस्लाम ने बौद्ध धर्म का विध्वंस किया.... संदर्वित ग्रंथ एवं पुस्तक: Dr Babasaheb Ambedkar Writings and Speeches Volume 3 page 229 &...